गरीबी होते हुए भी प्रमाणिक पण की ज़िंदा मिसाल ; अमलनेर मे महिला द्वारा देखने मिली


दिनांक 25/05/2023 को शाम 4 बजे कुम्भार टेक क्षेत्र की रहने वाली श्रीमती ललिता चंद्रशेखर सोनार कचहरी के सामने श्रीगणेश पैथोलॉजी लैब में चिलचिलाती धूप में रोज की तरह काम करने जा रही थी, तभी उन्हें अमलनेर बस स्टेशन के सामने पड़े 500 रुपये की 9 नोट की पोटली मिली.उन्होंने वहा आजु बाजु देखा लेकिन कोई दिखाई नही दिया वहां कोई नहीं होने के कारण वह अपने कार्यस्थल पर गई और श्रीगणेश पैथोलॉजी के मालिक श्री सुनील पाटिल को पैसे मिलने के बारे मे बताया.श्री सुनील पाटिल ने अमलनेर के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्री विजय शिंदे को मिले हुए पैसो के बारे मे फोन पर जानकारी दी और यह पैसे जिस किसी के भी हो उसे वापस दिये जाने चाहिए इस बारे मे बात की पुलिस निरीक्षक श्री विजय शिंदे ने पुलिस नाइक मिलिंद भामरे से मूल मालिक का पता लगाने और उसे अपने सामने लाना सुनिश्चित करने को कहा।उक्त स्थान पर जाकर पूछताछ करने के बाद, इस्लामपुरा क्षेत्र के 68 वर्षीय टैक्सी चालक कमरोदीन शेख अहमद के एक महत्वपूर्ण काम के लिए लिए गये उधार पैसो के बारे मे पता लगाया गया तो कमरुद्दीन ने कहा कि जेब से रूमाल निकालते समय पैसे कहीं गिर गए ,तब उन्हे कहा गया की चिंता मत करो, श्रीमती ललिता सोनार को आपके पैसे मिले है और आपको आपके पैसे वापस मिल जाएगे.यह सुनते ही कमरोद्दीन की आँखें भर आई फिर जब कमरुद्दीन ने पुलिस थाने में सौ ललिता सोनार को अर्शिर्वाद देते हुए थर्थराते हाथो से बक्शीष के रूप में 1000 रुपये देने लगे, तो सौ ललिता सोनार ने ईमानदारी से हाथ जोड़कर बक्शीष के पैसे लेने से इनकार कर दिया। जबकि श्रीमती ललिता सोनार की माताजी भी बीमार थीं और उन्हें डॉ. बहुगुणे के यहां भर्ती कराया गया था और पैसे की सख्त जरूरत थी, जब उन्होंने ईमानदारी दिखाई तो उपस्थित लोगों ने भी ललिता सोनार को उनकी ईमानदारी के लिए सलाम किया.
इस घटना से यह देखा जा सकता है कि आज भी जब सारी दुनिया पैसे के पीछे भाग रही है और भाई दुश्मन की तरह लड़ रहे हैं, तब भी इस समाज में ऐसे ईमानदार लोग हैं.

सलाम ललिता ताई भवदीय

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